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मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने बांधा समां

-मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने बांधा समां

मुजफ्फरपुर।दीपक।
“सुर नहीं है ताल नहीं है, पहले जैसा हाल नहीं है…” जैसे भावपूर्ण शब्दों के साथ रविवार को शहर के साहित्यिक माहौल में एक बार फिर कविता की गूंज सुनाई दी। 12 अप्रैल 2026 को अयोध्या प्रसाद खत्री साहित्यिक सेवा संस्थान के तत्वावधान में श्री गांधी पुस्तकालय, गोला रोड, मुजफ्फरपुर के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी के वरिष्ठ कवि सत्येंद्र कुमार ‘सत्येन’ ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि प्रमोद नारायण मिश्र ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ बज्जिका भाषा के चर्चित कवि रघुनाथ मोहब्बत पुरिया की रचना “सुंदर हय हम्मर देश…” से हुआ, जिसने शुरुआत से ही माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया।
गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सत्येंद्र कुमार ‘सत्येन’ की “नदिया के पार उतार दे रे मलहबा…”, ओम प्रकाश गुप्ता की “सुर नहीं है ताल नहीं है…”, हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा ‘दवा दारू वाले’ की व्यंग्यात्मक प्रस्तुति, प्रमोद नारायण मिश्र की “नियति के खेल के आगे…”, सुमन कुमार मिश्र की “एक दिन मरने के लिए” समेत कई कविताओं ने खूब तालियां बटोरीं।


इसके अलावा रामवृक्ष राम चकपुरी, अंजनी कुमार पाठक, अरुण कुमार तुलसी, राजीवेंद्र किशोर, मोहन सिंह, बाल कवयित्री सिद्धि मोहन, दीनबंधु आजाद, शायर सिग्बतुल्ला हमिदी और परशुराम ब्याहुत की रचनाओं ने भी श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में हाल ही में दिवंगत हुए समाजसेवी एवं वरिष्ठ कवि विष्णुकांत झा तथा सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा गया।
अंत में नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने सभी कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अध्यक्ष के आदेश के साथ ही अगले आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की गई।