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मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा आयोजित, रचनाओं ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

-मुजफ्फरपुर में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा आयोजित, रचनाओं ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

मुजफ्फरपुर। रविवार को गांधी पुस्तकालय, गोला रोड, मुजफ्फरपुर के सभागार में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा ने की, जबकि संचालन सुमन कुमार मिश्र ने किया।

कवि गोष्ठी का शुभारंभ आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की प्रसिद्ध रचना “किसने बांसुरी बजाई…” से हुआ, जिसे अंजनी कुमार पाठक ने सस्वर पाठ के माध्यम से प्रस्तुत कर वातावरण को काव्यात्मक बना दिया।

अध्यक्षीय आसन से डॉ. जगदीश शर्मा ने अपनी चर्चित रचना “विद्वानों की बोली की टोली में…” प्रस्तुत की। वरिष्ठ कवि सतेंद्र कुमार सत्येन ने पूर्वी शैली में भोजपुरी रचना “बेदर्दी न बुझले दिल के दरदिया…” सुनाई। संचालन कर रहे सुमन कुमार मिश्र की रचना “समय बीतते, समय नहीं लगता…” ने श्रोताओं को सोचने पर विवश किया।

ओम प्रकाश गुप्ता की रचना “यूं ही गुजर जायेगा यह, साल ना पूछिए…” विशेष रूप से सराही गई। अंजनी कुमार पाठक की ग़ज़ल “ग़मे जिंदगी हम बताने चले हैं…” ने भावनात्मक असर छोड़ा। रघुनाथ मोहब्बतपुरिया की व्यंग्यात्मक रचना “तरजुआ से तौल के लेल लाश के दाम…” ने सामाजिक यथार्थ को उजागर किया।

डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह की बज्जिका रचना “शहर में न कहियो जाएम, गांव के हम स्वर्ग बनाएम…”, अरुण कुमार तुलसी की “उपवन की सुंदरता पुष्प से पलते हैं…”, दीनबंधु आज़ाद का मुक्तक “महफिल में हंसना, मेरा मिजाज बन गया…”, रामबृक्ष राम चकपुरी की रचना “कोसते धिक्कारते देखते हैं…” तथा अशोक भारती की रचना “धूप पर जब लिखोगे, बात हकीकत की होगी…” ने श्रोताओं से खूब तालियां बटोरीं।

कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने उपस्थित कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं मासिक काव्य गोष्ठी के संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अध्यक्ष के आदेश से आगामी आयोजन तक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा के साथ कवि गोष्ठी का समापन हुआ।