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मुजफ्फरपुर में गूंजे कविताओं के स्वर — श्री गांधी पुस्तकालय में हुई मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा

-मुजफ्फरपुर में गूंजे कविताओं के स्वर — श्री गांधी पुस्तकालय में हुई मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा

मुजफ्फरपुर। दीपक कुमार तिवारी।

रविवार को श्री गांधी पुस्तकालय, गोला रोड स्थित सभागार में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहर के कई प्रतिष्ठित कवि एवं साहित्य प्रेमी एकत्र हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सतेंद्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन प्रमोद नारायण मिश्र ने अपने निराले अंदाज़ में किया।

गोष्ठी की शुरुआत कवि वीरेंद्र कुमार मल्लिक की मैथिली रचना “आएल साओन मास सुहावन” से हुई, जिसने श्रोताओं से भरपूर तालियाँ बटोरीं। अध्यक्ष सतेंद्र कुमार सत्येन की भोजपुरी रचना “मन करेला चहरती हम रेलवा, संगे संगे घूमती सोनपुर के मेलवा” ने सबका मन मोह लिया।

संचालक प्रमोद नारायण मिश्र की रचना “याद आई पर तुम ना आई, सुख गई सब तरुणाई”,
सुमन कुमार मिश्र की “दिन, सप्ताह और साल ऐसे गुजरता है, जैसे मुट्ठी से फिसलता है रेत”,
ओम प्रकाश गुप्ता की “आसमान के आंचल पर तब, सिंदूरी रंग छा जाता है”,
अंजनी कुमार पाठक की “जी चाहता है बना लूं तुझे हमसफर”
और देवेंद्र कुमार की “चुनती है कचड़ा, स्वेद लसित धूल में” जैसी रचनाओं ने काव्य रस की धारा बहाई।

इसी क्रम में राजवेंद्र किशोर की “तनहा जीना भी क्या जीना”,
अरुण कुमार तुलसी की “शेष जीवन की व्यथा, अब कौन हरे”,
उमेश राज की “गंगा की धारा है अनमोल” तथा हास्य कवि डॉ. जगदीश शर्मा की “मतदान हो चुका शहर में, ठंडा पड़ा बाजार है” ने माहौल में विविध रंग घोल दिए।
अंत में अशोक भारती की रचना “अंधेरी रात में तेरा मिलना भी क्या मिलना, चांदनी रात में मिलो तो कुछ बात बने” पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेवी मोहन प्रसाद सिन्हा ने अपने सारगर्भित शब्दों में कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन के अवसर पर संयोजक सुमन कुमार मिश्र ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
अंततः अध्यक्ष के आदेशानुसार अगले आयोजन तक के लिए कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की गई।

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