-मानव जीवन का परमलक्ष्य है भगवतप्राप्ति — आचार्य श्रीदास कमलेश जी महाराज
बंदरा (मुजफ्फरपुर)। दीपक।
प्रखण्ड के मतलुपुर स्थित अति प्राचीन बाबा खगेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। श्रीधाम अयोध्या से पधारे आचार्य श्रीदास कमलेश जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कहा कि — “इस मानव शरीर का परमलक्ष्य भगवतप्राप्ति ही है। जीवन की व्यस्तताओं के बीच भी व्यक्ति को दिन में कम से कम 15 मिनट भगवान की भक्ति के लिए निकालना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भक्ति का प्रभाव असीम है। बालक ध्रुव ने मात्र पाँच वर्ष की अवस्था में भगवान को प्राप्त कर लिया और सशरीर वैकुंठ धाम चले गए। महाराज जी ने कहा कि भगवान की भक्ति केवल दुखों की निवृत्ति के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और ईश्वर से एकात्म भाव के लिए करनी चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा — “ध्रुव जी, प्रह्लाद जी जैसे भक्तों के जीवन में भी संघर्ष और दुख आए, लेकिन उन्होंने विचलित हुए बिना भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। जीवन में कठिनाइयाँ आएँगी, परंतु जो भक्ति और धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है, भगवान स्वयं उसे अपने गोद में स्थान देते हैं।”
महाराज जी के मधुर वचनों और भावपूर्ण कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मौके पर पूर्व कुलपति गोपालजी त्रिवेदी, अमृतेश ठाकुर, अमर बाबू रतवारा, राजन पंडा, श्याम मलिक, शत्रुघ्न साहनी, आलोक पाठक, पवन व्यास, महादेव झा, संजय ठाकुर सहित हजारों भक्त उपस्थित रहे।
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