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बिहार देश का पहला राज्य है, जहां पर दो-दो केंद्रीय विश्वविद्यालय है: राधामोहन सिंह

-बिहार देश का पहला राज्य है, जहां पर दो-दो केंद्रीय विश्वविद्यालय है: राधामोहन सिंह

– महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने मनाया अपना 9 वां स्थापना दिवस

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने 9 वें स्थापना दिवस को बड़े उल्लास और गरिमा के साथ मनाया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के महात्मा बुद्ध परिसर स्थित आचार्य बृहस्पति सभागार, बनकट में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एवं सांसद राधा मोहन सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. परमेन्द्र कुमार वाजपेयी तथा सारस्वत अतिथि के रूप में प्रो. उपेन्द्र त्रिपाठी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
अध्यक्षीय उद्बोधन में विवि के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य ऐसी ज्ञान-धरा का निर्माण करना है, जहां भारतीयता के मूल्यों और परंपराओं के आलोक में नए विचारों, नवाचारों और सकारात्मक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित हो। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय तेज़ी से प्रगति की ओर अग्रसर है और अपनी शैशव अवस्था से निकलकर अकादमिक एवं भौतिक रूप से सशक्त हो रहा है। विश्वविद्यालय ने 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण कर लिया है तथा संबंधित मंत्रालय से डीपीआर स्वीकृति के बाद शीघ्र ही शिलान्यास एवं निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अगले सत्र से पाँच वर्षीय समेकित शिक्षा प्रणाली लागू की जाएगी। अकादमिक संस्कृति को सर्वोपरि रखा जाएगा और छात्र विश्वविद्यालय की कीर्ति एवं स्मृतियों के संवाहक बने रहेंगे। साथ ही, एमजीसीयू खेल, योग, ध्यान और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। परिसर निर्माण के बाद छात्र-छात्राओं के लिए आवासीय सुविधाएँ प्राथमिकता में रहेंगी।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एवं सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां पर दो-दो केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं। सिर्फ नौ वर्षों में ही विश्वविद्यालय ने एक अलग ख्याति अर्जित की है। एमजीसीयू सात शाखाओं व पंद्रह विभागों से शुरू हुआ था, पर आज बीस विभागों तक पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि यहाँ के विद्यार्थी निरंतर उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं। छात्रों को महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बेहतर बनाने की आवश्यकता है और साथ ही महात्मा गांधी के आदर्शों को स्मरण रखने की जरूरत है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. परमेन्द्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि शिक्षा का अर्थ सिर्फ सीखना नहीं है, बल्कि उस सीखे ज्ञान को समाज में उपयोग करना है। 2047 का भारत सक्षम भारत हो, आत्मनिर्भर भारत हो, विकसित भारत हो। बड़े होने का अर्थ सहजता से आगे बढ़ना है और एमजीसीयू इसी सहजता के साथ नौ वर्ष पूरे कर आगे बढ़ रहा है। भारत आज “आइडिया ऑफ इंडिया” के रूप में उभर रहा है और जियो-पॉलिटिकल विमर्श के केंद्र में आ चुका है। इस परिप्रेक्ष्य में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और यह बड़ा प्रश्न है कि शिक्षा कैसी हो और उसे किस दिशा में ले जाया जाए।
सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. उपेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि स्थापना दिवस का उद्देश्य विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को दोहराना है। शिक्षा के जरिए आत्मबोध व आत्मज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण भी करना है। सम्पूर्ण विश्व में शांति का ज्ञान महात्मा गांधी से मिला है।

स्वागतीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के मुख्य कुलानुशासक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों व छात्रों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आज एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुँच गया है, जिसे हम बड़े हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं। समारोह के अंत में प्रो. प्रसून दत्त ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही ‘स्वच्छता ही सेवा है’ अभियान के समापन के उपरांत विवि के सफाई कर्मियों को कुलपति ने अंगवस्त्र व उपहार देकर उनका आभार प्रकट किया।

स्थापना दिवस समारोह में विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। वक्ताओं ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, शिक्षा के क्षेत्र में उसके योगदान तथा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।