बिहार की तीन विभूतियों को पद्मश्री, पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी के पैतृक गांव मतलूपुर में खुशी की लहर
-बिहार की तीन विभूतियों को पद्मश्री, पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी के पैतृक गांव मतलूपुर में खुशी की लहर
मुजफ्फरपुर/बन्दरा।दीपक।
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को वर्ष 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इस सूची में बिहार की तीन प्रतिष्ठित हस्तियों—भरत सिंह भारती, विश्वबंधु और डॉ. गोपालजी त्रिवेदी—को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। इस घोषणा के बाद पूर्व कुलपति डॉ. गोपालजी त्रिवेदी के पैतृक गांव मतलूपुर (बन्दरा प्रखंड) में उत्साह और गर्व का माहौल है।
सम्मान की खबर मिलते ही गांव और आसपास के इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। स्वजन, परिजन और ग्रामीण एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं। पूर्व कुलपति के पुत्र डॉ. रमन त्रिवेदी ने रविवार की रात बताया कि जैसे ही यह समाचार मिला, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि हमें अपने पिता पर हमेशा गर्व रहा है, और इस सम्मान ने उस गर्व को कई गुना बढ़ा दिया है। गांव और पूरा इलाका स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है, लगातार बधाई के फोन कॉल आ रहे हैं।

गौरतलब है कि डॉ. गोपालजी त्रिवेदी देश के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद और राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। उनका पैतृक आवास बन्दरा प्रखंड के मतलूपुर ग्राम में स्थित है। बिहार में कृषि क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदानों के लिए वे व्यापक रूप से जाने जाते हैं। कृषि विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक के उपयोग और सतत खेती को बढ़ावा देने में उनका कार्य सराहनीय रहा है।
शतक के करीब आयु होने के बावजूद डॉ. त्रिवेदी आज भी कृषि कार्यों को लेकर सक्रिय हैं। वे समय-समय पर किसानों को वैज्ञानिक सलाह देते रहते हैं और युवाओं को कृषि क्षेत्र में अवसरों के लिए प्रेरित करते हैं। मत्स्य उत्पादन, मक्का उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण, एकीकृत खेती, मॉडल फार्मिंग और तालाबों के विकास जैसे विषयों पर उनका सतत अभियान रहा है। आम और लीची उद्यानों के विस्तार, मक्का व चना जैसी फसलों की व्यवसायिक खेती तथा विज्ञान आधारित कृषि उनके कार्यों का प्रमुख केंद्र रहा है।
पद्मश्री सम्मान पर डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे किसानों, छात्रों और कृषि से जुड़े सभी साथियों के सामूहिक प्रयासों का सम्मान बताया। उनके इस सम्मान से न सिर्फ मतलूपुर गांव बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।