Advertisement

पहली अर्घ्य की रात डाला जागरण की परंपरा, छठ गीतों से गूंजता है आंगन

–पहली अर्घ्य की रात डाला जागरण की परंपरा, छठ गीतों से गूंजता है आंगन

वैशाली। मोहन कुमार सुधांशु। छठ महापर्व के दौरान पहली अर्घ्य की रात “डाला जागरण” की विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो लोक आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घाट से अर्घ्य देने के बाद जब डाला घर लाया जाता है, तब घर के आंगन में व्रती और परिवार की महिलाएं मिलकर डाला को सजाती और सहेजती हैं।
इस दौरान पारंपरिक छठ गीतों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। महिलाएं धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं और डाला को “जगाने” की रस्म निभाती हैं। यह प्रक्रिया रात भर श्रद्धा और भक्ति के साथ चलती है।


पूजन के बाद डाला को विधिवत बंद कर कुलदेवता के समक्ष सुरक्षित रखा जाता है। इसके पश्चात अगली सुबह व्रती और परिवार के सदस्य पुनः डाला लेकर छठ घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
यह परंपरा न केवल छठ महापर्व की धार्मिक गरिमा को बढ़ाती है, बल्कि पारिवारिक एकता, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने का कार्य करती है।