‘पढ़ लिख बबुआ, कलम में जान बा’
-रील्स बनाने वाली पीढ़ी के लिए बिहार का वीडियो एक सबक
ब्यूरो।पटना/कैमूर।
बिहार की राजधानी पटना को देखिए, भागलपुर, पूर्णिया या फिर गया जिले को। नौजवान पीढ़ी आपको सड़कों पर रील बनाती नजर आ जाएगी। कोई बाइक स्टंट कर रील बना रहा है तो कोई फिल्मी गानों पर नाच कर उसे इंस्टा पर अपलोड कर रही है। इस पीढ़ी को शायद ये मालूम नहीं कि वो जिस बाइक या जिस मोबाइल से ये सबकुछ कर रही है, उसे खरीदने के पैसे कहां से आए? वो पैसे उन माता-पिता के हैं जो कड़ी मेहनत कर अपनी औलाद को कुछ बनाना चाहते हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ये दिखाया कि इन पीढ़ियों के बीच एक जमात ऐसी भी है जिसे डीएम-एसपी बनना है।
इस पीढ़ी को आईएएस या आईपीएस बनना है। इसके लिए वो यूपीएससी जैसी ‘अग्निपरीक्षा’ में खुद को तपाने तक के लिए तैयार है। ये नजारा दिखा कैमूर जिले में। दरअसल यहां के डीएम सावन कुमार ने शनिवार को अपने आवास पर बाल संसद लगाई। इस बाल संसद में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राएं पहुंचीं। ये सिवो भभुआ की छात्राएं थीं। इन बच्चियों पर भी एक बेहतर रील बन सकती है। लेकिन वो रील स्टंट या फिल्मी गानों पर नहीं बल्कि उनके हौसले और जुनून पर क्रिएट होगी।

इन बच्चियों ने डीएम से सीधा सवाल किया और पूछा ‘आप जिस पद पर है उस पद पर आने के लिए कौन सी पढ़ाई करनी होगी।’ डीएम सावन कुमार ने बड़ी शालीनता से जबाब दिया कि आप लगातार पढ़ाई करते रहो तो मेरे पद पर पहुंच जाएंगी। इसके बाद सातवीं की छात्रा सुनैना ने डीएम सावन कुमार से पूछा कि ‘क्या यूपीएससी की परीक्षा पास करने पर जिले का डीएम पद मिलता है?
वहीं दूसरी छात्रा नैना कुमारी ने सवाल किया कि ‘सर हम डॉक्टर बनना चाहते है। मेरी मम्मी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है।’ इसका जवाब कैमूर एसपी ललित मोहन शर्मा ने दिया कि ‘आप लगातार पढ़ाई करते रहें। मैट्रिक के बाद प्लस 2 में साइंस लें। बायलॉजी की पढ़ाई करने के बाद मेडिकल टेस्ट पास करना होगा। उसके बाद आप मेडिकल कॉलेज से पास कर डॉक्टर बन सकते हैं। बच्चियों को जिले के डीएम ने अपने आवास पर पार्टी भी दी और उन्हें भोजन कराया। इसमें डीएम की पत्नी ने भी उनका हाथ बंटाया। इस दौरान एक बच्ची ने गाना गया कि ‘पढ़ लिख बबुआ, कलमिये में जान बा।’
डीएम बच्चों से बात करके बेहद खुश दिखे। अब समझना उस पीढ़ी को है जो अपने माता-पिता की गाढ़ी कमाई के मोबाइल से रील और शॉर्ट्स बनाने में बिजी है। साथ ही नवभारत टाइम्स भी बच्चों से अपील करता है कि वो अपने पुरखों की मेहनत का सम्मान करें। उनकी खून-पसीने की कमाई से रील्स न बनाएं बल्कि ये सोचें कि वो ऐसी कौन सी किताबें खरीदें जो उन्हें तरक्की और ज्ञान के रास्ते पर ले जाए। अगर रील्स वाली पीढ़ी इन बच्चियों के जैसा सोचेगी और करेगी तो फिर दुनिया उनके रील और शॉर्टस बनाएगी। वो तब जब आप भी आईएएस या आईपीएस जैसी पोस्ट पर जाएंगे और कुछ ऐसा करेंगे जिससे सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि देश और बिहार का नाम रौशन हो।








