-निराला निकेतन में मासिक कवि गोष्ठी: रचनाओं ने बांधा समां
-मुजफ्फरपुर में महावाणी स्मरण कार्यक्रम, कवियों की रचनाओं ने किया मंत्रमुग्ध
-आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की तपोभूमि में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन
-कवि सतेंद्र कुमार सत्येन की अध्यक्षता में निराला निकेतन में गूंजा काव्य रस
-मुजफ्फरपुर की कवि गोष्ठी में नारी सम्मान से लेकर बसंत तक गूंजी विविध रचनाएं
मुजफ्फरपुर। परम श्रद्धेय आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की तपोभूमि निराला निकेतन, मुजफ्फरपुर में रविवार को मासिक महावाणी स्मरण सह कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सतेंद्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन का दायित्व कवि दीनबंधु आजाद ने निभाया।
कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं के कवियों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रमुख रचनाओं में—
वरिष्ठ कवि सतेंद्र कुमार सत्येन की विदेशिया शैली पर आधारित भोजपुरी रचना “नया न्योतार कनिया घरबा में छोड़ी के…”
कवि डॉ. हरिकिशोर प्रसाद सिंह की बसंत आगमन पर आधारित रचना “बसंत आ गया, खिली फूलों की कली…”
कवि ओम प्रकाश गुप्ता की नारी सम्मान पर केंद्रित प्रभावी कविता “प्रश्न बनकर दुनिया जब सामने खड़ी हो…”
कवियित्री ऊषा किरण श्रीवास्तव की प्रस्तुति “तनी बताब नंदी बाबा…”

कवि अंजनी कुमार पाठक की प्रेरक रचना “याद आती है वो पुरानी बातें…”
कवि शशि रंजन वर्मा की मार्मिक कविता “कोई और नहीं होती, जो मां होती है…”
मुक्तककार दीनबंधु आजाद का मुक्तक “जिंदगी में आपकी अहमियत बता नहीं सकते…”
कवि अशोक भारती की भावपूर्ण रचना “हाथ तो रोज़ मिलाते हो, क्या दिल भी मिलाओगे…”
कवि रघुनाथ मोहब्बतपुरिया की “माई बाबूजी से बढ़के ना कोई…”
तथा कवि अरुण कुमार तुलसी की दार्शनिक रचना “जीवन का यह मोह घना…”
इन सबने वातावरण को साहित्यिक रस में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन प्रसाद सिन्हा ने सभी आगंतुक कवियों, शायरों व श्रोताओं के प्रति आभार प्रकट किया।
इसी दौरान शहर के प्रमुख समाजसेवी श्री विश्वजीत कुमार के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
अध्यक्ष के निर्देशानुसार आगामी आयोजन तक के लिए कार्यक्रम को स्थगित कर विराम दिया गया।











