-डिजिटल जनगणना 2027 का खाका तैयार: 4 चरणों में जुटेगा देश का डेटा, लिव-इन रिश्तों पर भी खास फोकस
नई दिल्ली।ब्यूरो।
देश में 2027 में होने वाली जनगणना को लेकर सरकार ने व्यापक और आधुनिक खाका पेश किया है, जो प्रशासनिक के साथ-साथ सियासी दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और चार चरणों में संपन्न कराई जाएगी।
पहले चरण की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से “सेल्फ एन्यूमरेशन” के रूप में होगी। इस प्रक्रिया में नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल या निर्धारित फॉर्म के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी भरेंगे। इस दौरान कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को कवर करेंगे। खास बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को भी शादीशुदा के रूप में दर्ज किया जा सकता है, यदि वे अपने रिश्ते को स्थायी मानते हैं।

सरकार के अनुसार, यह “हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना” देश के घरों, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक संरचना की सटीक तस्वीर पेश करेगी, जिससे नीतियों के निर्माण में मदद मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे, जिससे जनगणना लगभग पेपरलेस हो जाएगी।
दूसरे चरण में सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। इसके बाद तीसरे चरण में सुपरवाइजर स्तर पर डेटा का क्रॉसचेक किया जाएगा, जहां हर छह कर्मचारियों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त रहेगा। चौथे और अंतिम चरण में नागरिकों की विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी, जिसमें जातिगत आंकड़े भी शामिल होंगे, एकत्रित की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और बेहतर योजनाओं की नींव बता रही है, वहीं विपक्ष इसे निजता और सामाजिक संतुलन से जोड़कर सवाल उठा सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह डिजिटल जनगणना देश के विकास का मजबूत दस्तावेज साबित होती है या फिर सियासत के नए समीकरणों का आधार बनती है।











