-विवाह पंचमी महोत्सव के तीसरे दिन धनुष यज्ञ का आयोजन किया गया
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर।
सप्ताहव्यापी सीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के तीसरे दिन अयोध्या से आयी रामलीला मंडली द्वारा धनुष यज्ञ का आयोजन किया गया। धनुष यज्ञ में कई देशो के राजकुमार पधारे थे। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो शिवजी के धनुष को तोड़ेगा उसी राजकुमार से सीता की शादी होगी। रामायण के अनुसार सीता जी पांच बर्ष की उम्र में ही शिवजी के पिनाक धनुष कोबांये हाथ से उठाकर जहां पिनाक धनुष रखा था उस जगह को निपाई कर रख दिया। इस दृश्य को राजा जनक ने स्वयं आंखों से देखा था। उसी दिन राजा जनक ने प्रतिज्ञा किया की सीता की शादी उसी राजकुमार से करेंगे जो इस धनुष को तोड़ेंगे।

धनुष यज्ञ एक बढकर एक राज कुमार आये थे। किसी से धनुष तोड़ने की बात तो दूर टससे मस नहीं हुआ। राबण भी आये थे। उन्हे अपने बल पर अहंकार था। वे अंगुली से उठाना चाहा। फिर पूरे बल लगा दिया। लेकिन धनुष को उठा नहीं सके। रानी सुनयना, जनक काफी उदास हो गयी। सुनयना ने कहा कि यह पृथ्वी वीरविहीन है। धनुष यझ में उपस्थित लक्षमण ने क्रोधित होकर उठना चाहा लेकिन राम ने रोक दिया। फिर बिश्वामित्र के आदेश पर राम ने धनुष को उठकर तोड़ दिए। धनुष टुटने की आबाज से पृथ्वी कांप गयी। तेज आबाज हुयी। धार्मिक मान्यता के अनुसार पिनाक धनुष का एक टुकड़ा आकाश, एक टुकड़ा पाताल तथा एक टुकड़ा पृथ्वी पर गिरा। जहां धनुष का टुकड़ा गिरा वह स्थान धनुषा धाम है। वहां अभी अबशेष मौजूद है। देवताओं ने भी खुशी की लहर दौर गयी। राज दरवार में मुरझाए ओठ पर मुस्कान आ गयी। धनुष टूटने खबर सुनकर परशुराम क्रोधित होकर धनुष यज्ञ में आये। वहां परशुराम तथा लक्ष्मण का संवाद होता है। कलाकारों ने ऐसी प्रस्तुति की मानो सचमुच त्रेता का धनुष यज्ञ हो। इस धनुष यज्ञ कार्यक्रम को हजारों लोगो ने देखा। जानकी मंदिर के महंथ राजा जनक की भूमिका में उपस्थित थे। धनुष यज्ञ में जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास बैष्णव सहित नगर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।












