घोसरामा में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

-घोसरामा में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

मुजफ्फरपुर/बंदरा।दीपक। नवयुवक नाट्य कला परिषद सह सांस्कृतिक मंच, घोसरामा के तत्वाधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ रविवार को घोसरामा ब्रह्मस्थान परिसर (पुस्तकालय) में आचार्य फुलकांत झा, विजय कुमार झा एवं मनोरंजन झा के सानिध्य में किया गया। कथा के मुख्य नवीन कुमार ने व्यास पूजन किया। संगीतमय भजनों से पूरे गांव का माहौल भक्ति के रस में सराबोर हो उठा।

कथा प्रवाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने पहले दिन भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि मृत्यु को जानने से मृत्यु का भय मन से मिट जाता है, जिस प्रकार परीक्षित ने भागवत कथा का श्रवण कर अभय को प्राप्त किया, वैसे ही भागवत जीव को अभय बना देती है।

चंचला दीदी में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है। यह परमहंसों की संहिता है, भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। भागवत कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। यह कथा रूपी अमृत देवताओं को भी दुर्लभ है।

इस मौके पर कमिटी के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, कोषाध्यक्ष संजीव कुमार, अनिल ठाकुर, महेश ठाकुर, राजकिशोर ठाकुर, रंजन ठाकुर, विद्यानंद ठाकुर, राजेश सिंह, ललन सिंह, हरिओम झा समेत सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष मौजूद थे।