घोसरामा ब्रह्मस्थान में श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस भक्ति का प्रवाह, चंचला दीदी ने बताया कृष्ण प्राप्ति ही मानव जीवन का लक्ष्य
-घोसरामा ब्रह्मस्थान में श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस भक्ति का प्रवाह, चंचला दीदी ने बताया कृष्ण प्राप्ति ही मानव जीवन का लक्ष्य
मुजफ्फरपुर/बंदरा ।दीपक तिवारी। घोसरामा ब्रह्मस्थान परिसर स्थित पुस्तकालय में नवयुवक नाट्यकला परिषद् सह सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन (द्वितीय दिवस) श्रद्धा और भक्ति से सराबोर वातावरण देखने को मिला। कथा प्रवाचिका निकुंज मंजरी चंचला दीदी ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि आप सभी पर ठाकुर जी की विशेष कृपा है, तभी आप श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोविंद जितना प्रदान करते हैं, उतना ही भक्त को प्राप्त होता है।
कथा के दौरान चंचला दीदी ने कहा कि यदि श्रद्धालु भागवत कथा सुनने के लिए प्यासे भाव से, कुछ सीखने और पाने के उद्देश्य से आते हैं, तो यह कथा उन्हें केवल कुछ नहीं बल्कि बहुत कुछ प्रदान करती है।

उन्होंने शुकदेव–परीक्षित संवाद, राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप तथा शुकदेव जी के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही कथा के महत्व, भगवान के स्वरूप और भक्ति की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कथा श्रवण से हृदय निर्मल होता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग मिलता है।
उन्होंने कहा कि प्रभु से बढ़कर कोई सुख और सम्पदा नहीं है। भागवत कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं का सदैव कल्याण होता है। आज का मानव जीवन विषय-वासनाओं के भोग में उलझ गया है, जबकि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति है। यदि मनुष्य दृढ़ निश्चय कर ले कि उसे जीवन में कृष्ण को पाना है, तो उससे बड़ा कोई सुख या संपत्ति नहीं हो सकती।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर अरुण ठाकुर, अमरेंद्र ठाकुर, सुशील ठाकुर, नागेंद्र ठाकुर, कृष्णाकुमार ठाकुर, जगतानंद ठाकुर, वेदानंद ठाकुर, अनिल झा, सुबोध ठाकुर, शुभम कुमार, सत्यम कुमार, निखिल झा, सुंदरम सिंह, ऋतिक सिंह, गोलू समेत सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।