-ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा डीजे साउंड सिस्टम का प्रचलन,बढ़ा रहा परेशानी
-बेरोक-टोक बढ़ रहा धंधा,बीमार लोगों की बढ़ा रही परेशानी
-कई जगह विवादों का भी बन रहा वजह
-15-20हजार में होती है बुकिंग
-शादी के समयों में एडवांस रहती है बुकिंग,विभिन्न सड़कों से सरपट बजती गुजरती हैं गाड़ियां
-इलाके में गांव-कस्बों में रात भर बजती है डीजे
-ब्रह्म-काली पूजने आदि के दौरान खुलेआम बजती है डीजे और मस्ती में नाचती हैं आयोजक परिवार-क्षेत्र की महिलाएं

मुजफ्फरपुर/समस्तीपुर। दीपक कुमार तिवारी।
भले ही इलाके में हाई डेसिबल डीजे साउंड सिस्टमों के बजाने से कई तरह के नुकसान हो रहे हैं,लोगों को असुविधा हो रही हैं,लोगों में परेशानी बढ़ रही है, बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में डीजे साउंड सिस्टम का प्रचलन बेधड़क एवं बेरोक-टोक बढ़ रहा है। जिसके कारण से प्रखंड एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में लोग परेशान हैं। खासकर सभ्य समाज एवं विभिन्न वर्गों के बुद्धिजीवी समाज में डीजे के बढ़ते इस प्रचारण को लेकर खास नाराजगी है, इसके बावजूद इन मामलों में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं होने की वजह से तथा इसके कारोबारी एवं संरक्षकों के बढ़ते मनोबल की वजहों से अक्सर लोग चुप्पी साध ले रहे हैं। वहीं इस मसले को लेकर ना स्थानीय विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधि गंभीर हैं, न हीं पुलिस प्रशासन। यदा-कदा डीजे साउंड को लेकर घटना-दुर्घटना या बड़े मामले होने पर ही कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की जाती है। यह अलग बात है कि विभिन्न धार्मिक आयोजनों के मौके पर शांति समिति की बैठक आयोजित कर डीजे बजाने पर प्रतिबंध रहने की बात बता दी जाती है, इसके बावजूद उन स्थलों पर डीजे बजते सुना- देखा जाता है और कार्यवाई सिफर रहती है। क्षेत्र में शादी-लग्न की शुरुआत के साथ ही विभिन्न इलाकों में विभिन्न आयोजन स्थलों तथा इस दौरान शाम एवं रात में सरपट भागती डीजे गाड़ियों पर साउंड बजने रहने से भी लोगों को परेशानी हो रही है। पूसा में इलेक्ट्रिक दुकानदार रौशन जायसवाल बताते हैं कि जब वे लोग रात में घर में सोए रहते हैं, तब देर रात बाहर सड़कों से बाराती से लौटती डीजे गाड़ियों में हाई डेसीबल साउंड पर अश्लील भोजपुरी गाना बजती गाड़ियां निकलती है।जिससे ना चाहते हुए भी वे लोग नींद से जग जाते हैं।डीजे के धमक से चौकी-पलंग-मकान में कम्पन होने लगती है। लोग धरफरा कर नींद से जाग जाते हैं।ऐसा एक दिन और एक बार नहीं होता।शादी विवाह के समयों में रोजाना होता है। घर के छोटे बच्चे भी जग जाते हैं। बड़े बुजुर्ग भी जग जाते हैं।इस दौरान कई तरह की परेशानियां होती हैं। पर पता नहीं कुंभकरण की निद्रा में सोए हुए प्रशासन को यह सुनाई क्यों नहीं देती।सड़क पर जहां-तहां चेकिंग के नाम पर चालान काटने वाली पुलिस को यह गाड़ियां क्यों नहीं दिखती।

सकरी में सीनियर सिटीजन के कृष्ण कुमार तिवारी बताते हैं कि उन्हें बीपी की परेशानी है। गांव-टोला-सड़क पर अनावश्यक हाई डेसिमल डीजे बजाने की वजह से उनका मन विचलित होने लगता है, परंतु पुलिस की कार्रवाई नहीं करने से यह प्रचलन लगातार बढ़ गया है। भूतपूर्व सैनिक अशोक ठाकुर ने बताया की डीजे बजाने से उनका धड़कन बढ़ जाता है। मना करने पर विवाद हो जाता है। उल्टे संचालक हीं हम बुद्धिजीवियों को ही धमकाने लगता है। सखोरा का एक डीजे संचालक सकरी मन गांव में छठ में रात भर अश्लील गाना बजाता रहा। इस दौरान रोकने पर वह इस तर्क के साथ विवाद पर अड़ गया कि रोक है तो थाना पुलिस क्या करता है।क्यों नहीं रोकता है। हत्था पंचायत का एक डीजे संचालक ने बताया कि प्रशासन यदि रोक लगा दे तो हम लोग क्यों कारोबार करेंगे।विभिन्न क्षेत्रों से डीजे गाड़ियां निकलती है। लोगों में इसका प्रचलन है। लोग भाड़ा करते हैं तभी तो धंधा बढ़ रहा है। अब तो एक डीजे चलाने वाले धंधेबाज कई कई डीजे गाड़ियां बनवा रखी है और सभी गाड़ियां लग्न में एडवांस बुक रहती।कई लग्न तिथियों पर तो मारामारी रहती है।मुंहमांगे कीमतों पर लोग बुक कराते हैं। उनका तर्क है कि धंधा मंदा होगा तो धंधा खुद रुक जाएगा। ग्रामीणों का बताना है कि दुर्गा पूजा के दौरान विसर्जन के दौरान सकरी मन गांव में भी डीजे बचाने को लेकर ही तीखी झड़प आदि की घटना हुई थी। पुलिस की गाड़ी में तोड़फोड़ की घटना हुई थी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर घटना के प्रकार को बदल दिया गया। कुछ साल पहले भी केवट्सा चौक पर दुर्गा पूजा के दौरान डीजे साउंड रात भर बजने को लेकर हीं ही विवाद हुआ था।डीजे साउंड के बढ़ते प्रचलन, इसके कई तरह के साइड इफेक्ट के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि सामाजिक एवं राजनीतिक कारणों से मुखरता से विरोध नहीं कर पा रहे हैं,वहीं स्थानीय पुलिस भी कार्रवाई की चेतावनी लेकर खामोश हो जा रही हैं।

प्रभारी चिकित्सक बोले,यह है खतरनाक,कुछ भी हो सकता है:
डीजे साउंड सिस्टम के कुप्रभाव को लेकर बन्दरा प्रखंड के प्रभारी चिकित्सक डॉक्टर नौशाद अहमद ने बताया की डीजे साउंड से ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है।इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। बीपी बढ़ जाता है। धड़कन बढ़ सकता है। कान के मरीजों को भी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि अचानक या लगातार डीजे साउंड का बजना कई तरह के खतरा पैदा कर सकता है। कुछ भी हो सकता है। लोगों की मौत भी हो सकती है। खासकर बच्चे-बूढ़े एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को सदैव इससे खतरा रहता है। ऐसे लोगों को इससे सदैव बचकर रहने की जरूरत है। वही नींद में अचानक हाई डेसिमल साउंड बजने से लोग घबराकर उठते हैं और ऐसे में अटैक का खतरा ज्यादा रहता है।खासकर बीपी एवं हर्ट के मरीजों के लिए यह क्षण ज्यादा खतरनाक है।यदि इस दौरान किसी कारणों से बीपी और धड़कन बढ़ा हुआ हो तो मौत तक भी संभव है।








