-गांधीवाद पर संगोष्ठी : “21वीं सदी का उद्घोषणा-पत्र” बना विमर्श का केंद्र
-एलएनएमयू के राजनीति विज्ञान विभाग में हुआ विचार मंथन, गांधी के दर्शन को बताया समय की माँग
दरभंगा। संवाददाता।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के राजनीति विज्ञान विभाग में बुधवार को “गांधीवादी दर्शन : 21वीं सदी का उद्घोषणा-पत्र” विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गांधी विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर गहन विमर्श हुआ, जिसमें वक्ताओं ने गांधीवाद को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और बीज वक्ता, काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व प्राध्यापक प्रो. सतीश कुमार राय ने कहा, “गांधीवाद आज भी केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है। सत्य, अहिंसा और स्वराज के सिद्धांतों में ही विश्व शांति और टिकाऊ विकास का आधार छिपा है।”
विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने गांधीवाद को एक नैतिक यात्रा बताया, जो व्यक्ति और समाज को भीतर से बदलने की शक्ति रखती है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ मुकुल बिहारी वर्मा ने कहा, “गांधी का दर्शन आत्मिक साधना है, जो बाहरी परिवर्तन से पूर्व आंतरिक चेतना को जगाता है।”

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ घनश्याम राय ने गांधी को अनुभवजन्य अभ्यास का प्रतीक बताया और कहा कि गांधी को समझना केवल किताबों से संभव नहीं, बल्कि जीवन में उतारना जरूरी है।
संकायाध्यक्ष प्रो. अजहर हसन ने कहा, “गांधीवाद आज के हिंसक और असहिष्णु समाज के लिए एक मानवीय विकल्प है।” वहीं, प्रो. बैजनाथ चौधरी ‘बैजू बाबू’ ने तकनीकी युग में नैतिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता जताते हुए गांधी दर्शन को व्यवहार में लाने की बात कही।
डॉ मनोज कुमार ने गांधी के सर्वोदय दर्शन को समावेशी विकास और सेवा की राजनीति का आदर्श मॉडल बताया और कहा कि यह आज की राजनीतिक विकृति का नैतिक समाधान है।
संगोष्ठी में डॉ उमाकांत पासवान (उप कुलसचिव प्रथम), डॉ जमशेद आलम, शबनम कुमारी सहित अनेक शोधार्थी, विद्यार्थी और शिक्षक-शिक्षिकाएँ शामिल रहे। विद्यार्थियों ने गांधीवाद को सामाजिक यथार्थ से जोड़ने के संकल्प के साथ अपनी सक्रिय भागीदारी दी।
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