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कृषि क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव हुआ है : राधा मोहन सिंह

-कृषि क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव हुआ है : राधा मोहन सिंह

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।

जिले के अरेराज में दो दिवसीय कृषि, मात्स्यिकी एवं पशुधन अंत्योदय मेला सह किसान सम्मान समारोह का आयोजन डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के तहत कृषि विज्ञान केंद्र परसौनी के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हमारा मानना रहा है कि गत दो दशकों में भारतीय कृषि क्षेत्र में यूपीए और एनडीए सरकारों के अंतर्गत दो भिन्न दृष्टिकोण देखने को मिले हैं | यूपीए के दौरान कृषि क्षेत्र की समग्रता, किसानों के आय को बढाने, कृषि कार्य में लागत मूल्य को करने और उसमें नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के प्रयोग से सम्बंधित विषयों को लेकर कोई समझ नहीं नहीं थी जबकि, एनडीए सरकार ने समग्रता के भाव से योजनाओं का निर्माण किया है एवं बर्ड आई व्यू से उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया और लक्षित समाज के लिए उसे हितकारी बनाया है | हमने किसान के हर श्रेणी को ध्यान में रखकर योजनायें बनायीं और उसके अपेक्षित परिणाम भी दिखने लगे हैं | आज सीमान्त किसानों के लिए ‘किसान सम्मान निधि उनके आत्मबल का साधन है, पीएम फसल बीमा योजना उनके जोखिमों को कम कर रही है, और हर खेत को पानी का हमारा दशकों पुराना नारा दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के माध्यम से सफल हो चुकी है”|
मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के प्रति अभूतपूर्व प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वर्ष 2013–14 में यू.पी.ए सरकार द्वारा आवंटित मात्र 18,981 करोड़ की तुलना में वर्ष 2025–26 के लिए 1,37,757 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है, जो सात गुना से अधिक की वृद्धि है। इसके विपरीत, कांग्रेस नेतृत्व वाली यू.पी.ए सरकार ने वर्ष 2009–2014 के दौरान पाँच वर्षों में कुल मात्र ₹1.21 लाख करोड़ का ही आवंटन किया था। इस निरंतर बढ़ते वित्त पोषण के परिणामस्वरूप, बेहतर आधार भूत संरचना, उच्च गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट, अनुसंधान तथा ग्रामीण रोजगार को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला है, इस तरह बढ़ते वित्तीय आवंटन में 70% से अधिक उपयोगिता दर्ज की गई है।
किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आरंभ की, जिसके अंतर्गत पात्र किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 तीन किस्तों में प्रदान किए जाते हैं। यह पारदर्शी एवं कुशल प्रणाली फरवरी 2025 तक 11 करोड़ से अधिक कृषक परिवारों को ₹3.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित कर चुकी है, जिसकी संपूर्ण लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन की गई है। इसके विपरीत, यू.पी.ए सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत राज्यों को जटिल दिशानिर्देशों एवं विलंब के साथ वित्तीय सहायता प्रदान की जाती थी, जिसके अंतर्गत वर्ष 2007 से 2014 के मध्य केवल ₹85,700 करोड़ की राशि ही जारी की गई, जिससे अपेक्षाकृत कम संख्या में किसानों को सीमित लाभ प्राप्त हुआ।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा प्रारंभ की गई किसान क्रेडिट कार्ड योजना यू.पी.ए शासनकाल में स्थिर रही, जहाँ वर्ष 2012–13 में केवल 1.29 करोड़ सक्रिय खाते थे तथा वर्ष 2013–14 में संस्थागत कृषि ऋण ₹7.3 लाख करोड़ तक सीमित था। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने इस योजना का व्यापक विस्तार करते हुए वर्ष 2023–24 तक सक्रिय खातों की संख्या को 7.75 करोड़ तक पहुँचाया, जिससे परिचालन ऋण 10.05 लाख करोड़ तथा कुल संस्थागत कृषि ऋण 25.48 लाख करोड़ तक पहुँच गया। इस विस्तार ने किसानों को समयबद्ध, सुलभ एवं लचीले ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित की, जिससे वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ बल मिला।
जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को ऋण की व्यवस्था विद्यमान थी। किंतु कमजोर क्रियान्वयन के कारण किसानों को इसका सीमित लाभ ही प्राप्त हो सका, तथा बिना जमानत ऋण की सीमा केवल ₹1 लाख तक सीमित थी। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने इस सीमा को ₹2 लाख तक बढ़ाया और संस्थागत ऋण प्रवाह को अभूतपूर्व स्तर तक पहुँचाया, जो वर्ष 2014–15 में ₹8.5 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2023–24 में ₹25.48 लाख करोड़ हो गया। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए ऋण उपलब्धता 57% से बढ़कर 76% तक पहुँच गई, और कृषि ऋण वितरण में 2.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई।
यू.पी.ए सरकार के कार्यकाल में, भारत की व्यापक कृषि संभावनाओं के बावजूद, कृषि निर्यात का समुचित उपयोग नहीं हो सका और वर्ष 2013–14 में यह केवल $37.29 अरब (₹2.98 लाख करोड़) तक ही पहुँच पाया। इसके विपरीत, मोदी सरकार द्वारा की गई नीति आधारित पहल और संस्थागत समर्थन के चलते वर्ष 2022–23 में कृषि निर्यात ऐतिहासिक स्तर पर पहुँचते हुए $53.15 अरब (4.5 लाख करोड़) हो गया, जो 20.4% की वृद्धि दर्शाता है, तथा 2024–25 में पुनः $50 अरब के आंकड़े को पार करने का अनुमान है। चावल, गेहूँ और चीनी का रिकॉर्ड स्तर पर निर्यात तथा वैश्विक चावल बाजार में भारत की 45% भागीदारी, यह प्रमाणित करती है कि एन.डी.ए सरकार ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक कृषि निर्यातक के रूप में स्थापित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत के लिए दिए गए विशेष बल ने भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है, जिससे भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाज़ार के द्वार खुल गए हैं। पहली बार अनार का निर्यात ऑस्ट्रेलिया, अंजीर पोलैंड, ड्रैगन फ्रूट लंदन तथा त्रिपुरा से कटहल का निर्यात जर्मनी जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक संभव हुआ है। कुछ ही वर्षों में मोदी सरकार ने यह उपलब्धि प्राप्त की है, जो कांग्रेस सरकार छह दशकों में भी नहीं कर सकी—इससे न केवल किसानों को सशक्त बनाया गया, बल्कि भारत की विशिष्ट कृषि उपज को वैश्विक मंच पर विशिष्ट स्थान भी प्राप्त हुआ है।
यू.पी.ए सरकार के कार्यकाल में कृषि में प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया, जबकि मोदी सरकार ने कृषि ड्रोन के माध्यम से इस क्षेत्र में एक अभूतपूर्व परिवर्तन लाया है।

कृषि यंत्रीकरण उप मिशन के अंतर्गत ₹141.39 करोड़ की राशि आवंटित की गई तथा 1,585 ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs) की स्थापना की गई। साथ ही, ₹1,261 करोड़ की “नमो ड्रोन दीदी” योजना के माध्यम से 15,000 महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को 80% अनुदान के साथ सशक्त किया जा रहा है। इन सुधारों के माध्यम से कृषि में कार्यकुशलता में वृद्धि, लागत में कमी तथा ग्रामीण आय में वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।
यू.पी.ए सरकार के कार्यकाल में भारत की कृषि क्षमता का समुचित उपयोग नहीं हो सका, और वर्ष 2013–14 में खाद्यान्न उत्पादन 264.38 मिलियन टन पर स्थिर बना रहा, साथ ही क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने हेतु कोई प्रमुख योजनाएं भी प्रारंभ नहीं की गईं। इसके विपरीत, मोदी सरकार द्वारा किए गए केंद्रित सुधारों एवं पहलों के परिणामस्वरूप कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन आया है। वर्ष 2022–23 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक 332.22 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया, तथा यह वर्ष 2024–25 में बढ़कर 341.55 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है, जो वर्ष 2013–14 की तुलना में लगभग 77 मिलियन टन की तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
यू.पी.ए सरकार के कार्यकाल में बागवानी विकास की प्रगति सीमित रही, जहाँ वर्ष 2005 में प्रारंभ की गई राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) ही एकमात्र प्रमुख पहल थी। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने बागवानी क्षेत्र में एक रूपांतरणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्ष 2024 में ₹1,765.67 करोड़ के निवेश के साथ क्लीन प्लांट कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिसके अंतर्गत नौ क्लीन प्लांट केंद्रों की स्थापना की गई। साथ ही, मध्यम अवधि बागवानी मिशन, बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम एवं लक्षित पीएम फसल बीमा योजना को एकीकृत रूप से लागू किया गया। इन पहलों के परिणामस्वरूप बागवानी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो वर्ष 2013–14 के 280.70 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 367.72 मिलियन टन तक पहुँचने का अनुमान है। यह वृद्धि एन.डी.ए सरकार के गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यद्यपि वर्ष 1985 में सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान ‘नीली क्रांति’ का सूत्रपात किया गया था, यू.पी.ए सरकार इस क्षेत्र में गति प्रदान करने या मत्स्य पालन प्रथाओं के आधुनिकीकरण में कोई ठोस प्रगति नहीं कर सकी। इसके विपरीत, मोदी सरकार के नेतृत्व में मत्स्य क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। वर्ष 2023–24 में भारत का मछली उत्पादन बढ़कर 184.02 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2013–14 की तुलना में 88.23 लाख टन की वृद्धि दर्शाता है। इस परिवर्तन का श्रेय वर्ष 2020 में ₹20,050 करोड़ की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के शुभारंभ को जाता है। जिसका उद्देश्य ‘नीली क्रांति’ को सशक्त बनाते हुए मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक एवं प्रतिस्पर्धी बनाना है।
यू.पी.ए सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के लिए मात्र ₹307 करोड़ का आवंटन किया गया, जो इस क्षेत्र के प्रति सीमित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने वर्ष 2021–26 की संशोधित राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 3,400 करोड़ की मंजूरी प्रदान की, जिससे 5.21 करोड़ से अधिक पशुपालक किसान लाभान्वित हुए हैं और 8.39 करोड़ पशुओं को कृत्रिम गर्भाधान, देशी नस्लों के संरक्षण तथा पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा जैसे उपायों के माध्यम से समाविष्ट किया गया है।
वर्ष 2014–15 से 2023–24 के बीच देश में दुग्ध उत्पादन में 63.56% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 239 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुँच गया, और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 5.7% रही, जो वैश्विक औसत 2% से कहीं अधिक है। प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता में 48% की वृद्धि हुई, जबकि प्रति पशु उत्पादकता 26.34% बढ़कर 2,072 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष हो गई, जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ वृद्धि दर मानी जा रही है। यह प्रगति कांग्रेस शासनकाल में देखी गई स्थिरता के विपरीत, मोदी सरकार की नीति-आधारित सक्रियता और पशुधन क्षेत्र में सुधारों का स्पष्ट प्रमाण है।