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ऐसे होगी तेजस्वी की ताजपोशी!

-ऐसे होगी तेजस्वी की ताजपोशी!

-लालू यादव का ‘टीपी प्लान’
-नीतीश के दिल्ली जाते ही आई बड़ी खबर

दीपक कुमार तिवारी।पटना।

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने बेटे बिहार के पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव की ताजपोशी करा कर ही मानेंगे। इसके लिए उन्होंने दो तरह का प्लान तैयार किया है। पहला प्लान है- तेजस्वी अपने बूते उतनी सीटें 2025 के विधानसभा चुनाव में हासिल कर लें, जिससे वे खुद ब खुद सीएम बन जाएं। यह प्लान फेल होने पर दूसरा प्लान अमल में आएगा। यह प्लान चुनाव बाद के लिए है। तेजस्वी अगर 2020 जितनी भी सीटें ले आए तो दूसरे प्लान से लालू उन्हें सीएम बना कर रहेंगे।
आरजेडी के मीडिया फ्रेंडली विधायक भाई वीरेंद्र ने हाल ही में कहा था कि तेजस्वी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद जरूर मिलेगा। तेजस्वी सीएम नीतीश कुमार के आशीर्वाद से ही बनेंगे। जल्दी ही बिहार में बड़ा सियासी खेला होगा। उनकी यह बात तब सामने आई, जब जेडीयू और बीजेपी की तल्खी के चर्चे खूब हो रहे थे। लालू यादव के परिवार से भाई वीरेंद्र की निकटता जो जानते हैं, उन्हें उनकी बातों पर भरोसा न करने का सवाल ही नहीं था। एक तो जेडीयू और बीजेपी के बीच तनातनी की खबरें और दूसरी ओर भाई वीरेंद्र के बयान से सबको उनकी बातों पर विश्वास होने लगा था।


भाई वीरेंद्र की बात पर अभी सियासी माथापच्ची चल ही रही थी कि तेजस्वी यादव सामने आ गए। इस बीच भाजपा-जेडीयू के रिश्तों पर जम रही बर्फ पिघलने लगी थी। भाजपा कोटे के डेप्युटी सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली से लौटते ही नीतीश की प्रगति यात्रा में शामिल हो गए। गिले-शिकवे अगर होंगे भी तो सम्राट के साथ आने के बाद दूर हो गए। तब तेजस्वी ने कहना शुरू कर दिया कि चुनाव के पहले कोई खेला नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इसकी जरूरत ही नहीं पड़ेगी, क्योंकि चुनाव नतीजे तो इंडिया ब्लॉक के पक्ष में ही आएंगे।
दरअसल लालू यादव को भी उम्मीद है कि चुनाव के नतीजे पिछली बार से इस बार बेहतर ही आएंगे। फिर भी संख्या बल में दो-चार विधायकों की कमी रह गई तो वो प्लान टीपी यानी तोड़-फोड़ अपनाएंगे। ऐसे में तोड़फोड़ की तकनीक से तेजस्वी सरकार बना लेंगे। अभी से ही लालू ने जेडीयू विधायकों के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है। उन्हें विजेंद्र यादव जैसे जेडीयू नेताओं से काफी उम्मीद है, जो जेडीयू में सहज महसूस नहीं करते। विजेंद्र यादव कई मौकों पर जेडीयू के भीतर अलग अंदाज और तेवर में दिखते रहे हैं।
लगता है कि अब आरजेडी को खेला पर ही अधिक भरोसा है। नीतीश कुमार ने जब आरजेडी का साथ छोड़ भाजपा से हाथ मिला लिया था, तब भी तेजस्वी ने खेला होने की बात कही थी। उनका खेला का संकेत बाद में डिकोड भी हो गया। लालू यादव की योजना नीतीश कुमार के विश्वास मत के दौरान ही उन्हें पटखनी देने की थी। इसीलिए आरजेडी ने अपने विधायक अवध बिहारी चौधरी को स्पीकर पद छोड़ने से मना कर दिया। प्लान फेल न करे, इसके लिए बीमा भारती जैसे जेडीयू के चार-पांच विधायकों को भी पटाया। पर, दांव उल्टा पड गया। आरजेडी और कांग्रेस के चेतन आनंद और नीलम देवी जैसे चार-पांच विधायकों ने ऐन वक्त खेमा बदल लिया। तेजस्वी की बहुप्रचारित खेला की योजना फ्लाप हो गई।