-एचआरपी और एईएस के लिए ‘लाइफलाइन’ बन रही एम्बुलेंस सेवा
– 76 सरकारी एम्बुलेंस का जिलाव्यापी जाल
– ‘102’ के फ्री रेफरल से सुरक्षित हो रहा मातृत्व और बचपन
मुजफ्फरपुर।
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के दिशा-निर्देशन में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अब ग्रामीण अंचलों में हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) और एईएस (चमकी बुखार) जैसी गंभीर चुनौतियों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर चुकी है। मुजफ्फरपुर की 76 सरकारी एम्बुलेंस सेवा अब केवल मरीजों को ढोने का माध्यम नहीं, बल्कि विषम परिस्थितियों में फंसी गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए ‘वरदान’ साबित हो रही है। ‘102’ डायल करते ही सुदूर पंचायतों तक पहुँच रही यह निःशुल्क सेवा मातृ मृत्यु दर को कम करने और एईएस के विरुद्ध छिड़ी जंग में सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है। विगत दो महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं, जहाँ फरवरी में 6730 और मार्च में 5832 लोगों को जीवन रक्षक निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई।
मातृ मृत्यु दर पर प्रहार, एचआरपी माताओं के लिए वरदान:
स्वास्थ्य विभाग का मुख्य फोकस मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में प्रभावी कमी लाना है। इसके लिए सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र से प्रतिदिन कम से कम एक हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) वाली माता की पहचान करें। सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने इस संबंध में बताया कि “हमारा प्राथमिक उद्देश्य प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य पर लाना है। इसके लिए एम्बुलेंस सेवा को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी एचआरपी माता को ससमय ‘हायर सेंटर’ शिफ्ट किया जा सके।” प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, बीसीएम और बीएचएम को पंचायत स्तर पर इस सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उपकरणों से लैस हैं पहिए:
गर्मी के बढ़ते प्रकोप और एईएस (चमकी बुखार) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ‘हाई अलर्ट’ मोड पर है। सभी 76 एम्बुलेंसों की सतत निगरानी की जा रही है ताकि वे ऑक्सीजन, जरूरी दवाओं और जीवन रक्षक उपकरणों से हमेशा लैस रहें। विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है, एईएस के लक्षण वाले किसी भी बच्चे को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुँचाकर उसे त्वरित उपचार देना।
102 डायल करते ही पहुँच रही मदद:
जिले के हर प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करते हुए औसतन 4 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रेहान अशरफ ने कहा कि “फरवरी और मार्च के आंकड़ों में एम्बुलेंस सेवाओं का बेहतर उपयोग दिखा है। अब हम प्रति एम्बुलेंस प्रतिदिन 6 लाभुकों को सेवा देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। स्टेट लेवल से भी इसकी निरंतर समीक्षा हो रही है ताकि सेवा पूरी तरह पारदर्शी और निःशुल्क रहे।” वर्तमान में एसकेएमसीएच में 8 और जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस विशेष रूप से मुस्तैद हैं।
यह पूरी ‘फ्री रेफरल ट्रांसपोर्ट सेवा’ सरकार की ओर से पूर्णतः निःशुल्क है। किसी भी आपात स्थिति में 102 पर कॉल कर यह सुविधा ली जा सकती है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े वृद्धजनों और गर्भवती महिलाओं के लिए संबल बनी हुई है।
जिले में एम्बुलेंस नेटवर्क:
जिले के औराई, बांद्रा, बोचहा, गायघाट, कटरा, कांटी, कुढ़नी, मड़वन, मीनापुर, मोतीपुर, मुरौल, मुसहरी, पारू, साहेबगंज, सकरा, सरैया में 04, जिला अस्पताल 04 तथा एसकेएमसीएच में 08 एम्बुलेंस वर्तमान में कार्यरत हैं।











