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इंजीनियर कुशल ने कृषि के क्षेत्र में किया उत्कृष्ट कार्य,वीसी ने किया पुरस्कृत

-समेकित कृषि प्रणाली को अपनाकर किसान अपनी आय को काफी बढ़ा सकते हैं–कुलपति
-इंजीनियर कुशल ने कृषि के क्षेत्र में किया उत्कृष्ट कार्य,वीसी ने किया पुरस्कृत

बोचहां।सम्वाददाता ।

समेकित कृषि प्रणाली को अपनाकर किसान अपनी आय काफी बढा सकते हैं उक्त बातें पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति पीएस पांडे ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर उपस्थित किसानों, वैज्ञानिकों एवं विभाग के वरीय अधिकारियों, आम लोगों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि पूरे भारतवर्ष में 731 कृषि विज्ञान केंद्र हैं जिसमें पूसा विश्वविद्यालय के अंतर्गत 16 कृषि विज्ञान केंद्र में तुर्की जो मुजफ्फरपुर में स्थित है तीसरे स्थान पर हैं जो पूसा यूनिवर्सिटी के लिए गौरव की बात है । उन्होंने कृषि के क्षेत्र में बेहतर कृषि कार्य की सराहना करते हुए कृषि में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए बोचहां प्रखंड के करणपुर दक्षिणी निवासी इंजीनियर व सफल किसान कुशल को पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति पी एस पांडेय ने अभिनव किसान पुरस्कार 2022 के लिए अंग वस्त्र के साथ पुरस्कृत किया है। बताते चलें कि कुशल जो इंजीनियर की डिग्री हासिल कर दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में कार्य कर रहे थे कोरोना काल में उनके माता-पिता ने कुशल को अपने घर बुला लिया और कृषि कार्य में मेहनत करने की प्रेरणा दी।पिछले 2 वर्षों में कुशल ने कृषि के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल की ।बोचहां के किसानों को संगठित कर उन्नत किस्म की खेती के लिए दर्जनों कार्यक्रम आयोजित किए। इस संबंध में कुशल के पिता सजल कुमार शील जो अधिवक्ता सह विधि संवाददाता के साथ-साथ मेहनती किसान भी हैं ने बताया कि कोरोना काल में अधिकतर सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान एवं प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर चला आया उस विकट परिस्थिति में किसानों के द्वारा उपजाए गए अनाज, सब्जी, फल आदि पर कोरोना कोई असर न पड़ा और कोरोना काल में आम लोगों को पेट भर खाना देने के लिए किसानों ने खेती नहीं छोड़ी और अपने खेत में अनाज, फल, सब्जी का फसल बखूबी करते रहे।

कुशल ने अपनी मेहनत और लगन से खेतों में खूब मेहनत की और अपने हौसले को बुलंद करते हुए यह ठान लिया कि वह अब चंद रुपयों के खातिर नौकरी नहीं करेंगे और कृषि कार्य में एकाग्रचित्त होकर कृषि का कार्य शुरू किया। कुशल ने बताया कि रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाओं का प्रयोग बंद कर जैविक खेती करने का मन बनाया और ऑर्गेनिक खेती शुरू की । मुसहरी लीची अनुसंधान केंद्र से संपर्क कर अपने 15 एकड़ में लगे लीची के बाग को नई तकनीक से विकसित कर मिसाल कायम किया और इस अनुसंधान केंद्र में अपने पेड़ो में 30 से 35 ग्राम की लीची का फल तैयार की और कृषि अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों को यह बता दिया कि किसानों को सही समय में लीची की फसल के संबंध में जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम दिया जाए तो मेरी तरह अधिकतर लीची के बाद रखने वाले किसान तो लाभान्वित होंगे ही साथ ही साथ उनके पेड़ो की लीची दूसरे देशों में ऊंचे दामों में बिकेगी।कुशल ने बकरी पालन, मुर्गी पालन ,बटेर पालन, गाय पालन से लेकर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी कार्य किया और उन्नत तरीके से लीची के बागान में काफी मेहनत की। खेतों में विभिन्न प्रकार के फसल लगाएं और किसानों को एकत्रित कर अपने कृषि फार्म में लाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा दी और आज उस मुकाम पर पहुंच गए और 2 वर्षों के मेहनत ने कुशल को उस मुकाम पर पहुंचा दिया जहां गणतंत्र दिवस के अवसर पर कुशल को पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपने हाथों अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया अपने संबोधन में कुलपति ने कुशल के फार्म पर आने का आग्रह भी स्वीकार कर लिया। पूछे जाने पर कुशल ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र तुर्की के वरीय वैज्ञानिक डॉक्टर मोती लाल मीणा ने मुझे हर मोड़ पर किसी कार्य में वेदर सहयोग किया और ढेर सारी जानकारी मुझे भी दी तथा किसानों को भी देते हुए फार्म पर किसानों के साथ बैठकर कार्यक्रम में भाग लिया इनके प्रयास से मैं उस मुकाम पर पहुंचा हूं। कुशाल ने दावे के साथ कहा की अगर किसान स्वयं को आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं तो कम मेहनत में ही वह आत्मनिर्भर तो बन ही सकते हैं साथ ही साथ आम लोगों को जैविक खेती द्वारा उपजाए अनाज, फल एवं सब्जी रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से खाने के तैयार सामानों से निजात दिला सकते हैं। जिसके लिए किसानों की एकजुटता बनानी होगी । उन्होंने अपने 10 एकड़ जमीन में अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर यह दिखा दिया कि किसानों को सिर्फ धान, गेहूं और मक्का की खेती से वे आत्मनिर्भर नहीं बन सकते हैं। किसानों को सब्जी, दलहन, तिलहन, मरुआ, कोदो, सामा आदि की खेती से बेहतर आय मिल सकती है । कुशल ने कहा कि उन्होंने किसानों के हित के लिए उनकी एकजुटता पर ग्रीन आहार इंडिया नामक एक कंपनी निबंधित कराया और किसानों को समय-समय पर उन्नत किस्म की खेती की जानकारी के लिए कार्यक्रम आयोजित किए। कुशल ने यह भी कहा की सरकार किसानों के लिए जो भी कार्यक्रम आयोजित करती है उस कार्यक्रमों को चाहे वह बैठक ही क्यों नहीं हो किसानों के खेतों में वह बैठक आयोजित होनी चाहिए ताकि किसानों से विभागों के अधिकारी रूबरू हो सके। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे तिरहुत कमिश्नरी के आयुक्त एवं जिलाधिकारी महोदय को अपने फॉर्म में लाकर अपने 2 वर्षों की उपलब्धि को साझा करेंगे और इन 2 वर्षों में किन किन विभागों से दिक्कतों का सामना करना पड़ा है उनके बारे में भी वे खुलकर अपनी बात रखेंगे। कुशल ने कहा की वह उन्नत खेती के लिए ड्रिप सिस्टम तो लगाया परंतु बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आज तक उनके खेत में ट्रांसफार्मर नहीं लगा जिसकी वजह से उनकी लाखों रुपए की क्षति हुई है। इस प्रकार की परेशानियां तब साझा की जा सकती है जब किसानों के खेतों में जाकर किसानों से संबंधित बैठक का आयोजन होगा तो सच्चाई सामने आ जाती और उसके बाद किसानों के बीच खुशी का माहौल होता ।