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अयोध्या में भगवान राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में फहराया केसरिया ध्वज

-अयोध्या में भगवान राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में फहराया केसरिया ध्वज

— RSS प्रमुख मोहन भागवत और CM योगी रहे साथ

अयोध्या।दीपक कुमार तिवारी।

भगवान राम मंदिर निर्माण भाजपा और RSS के प्रमुख एजेंडों में दशकों तक शीर्ष पर रहा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दो वर्ष पूर्व भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रोच्चार के बीच रामलला की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा किया था। मंगलवार को प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद ऐतिहासिक पल उस समय साकार हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया।

मंगलवार सुबह 11:50 बजे अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिमोट का बटन दबाते ही लगभग दो किलो वजनी केसरिया ध्वज 161 फीट ऊँचे शिखर पर लहराने लगा। ध्वजारोहण से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की पहली मंजिल पर बने राम दरबार में पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद उन्होंने रामलला के दर्शन किए। इस दौरान PM मोदी रामलला के लिए वस्त्र और चंवर लेकर पहुँचे।

ध्वजारोहण के समय रामलला सोने और रेशम के धागों से बने पीतांबर वस्त्रों में सुसज्जित थे। कार्यक्रम में देशभर के मठों के संत और महात्मा भी मौजूद रहे।

इसके पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में रोड शो किया, जहाँ स्कूली छात्रों ने मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। समारोह को लेकर अयोध्या को छावनी में बदल दिया गया था। ATS, NSG, SPG, CRPF और PAC के जवानों के साथ पाँच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी।

PM मोदी का संबोधन:

ध्वजारोहण के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा—
“सदियों की वेदना आज विराम पा रही है, और सदियों के घाव अब भर रहे हैं। सदियों से आस्था डिगी नहीं और न ही एक पल भी विश्वास टूटा। धर्म ध्वजा केवल ध्वजा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। आने वाले सदियों तक यह ध्वज प्रभु राम के आदर्शों का उद्घोष करेगा और हमें प्रेरणा देगा कि प्राण जाये पर वचन न जाये।”

PM मोदी ने आगे कहा—
“यह अयोध्या वह भूमि है जहाँ आदर्श आचरण में बदलते हैं, जहाँ राम ने अपना जीवन प्रारंभ किया। इसी धरती ने बताया कि समाज की शक्ति से एक व्यक्ति कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर लौटता है। विकसित भारत की यात्रा को गति देने के लिए ऐसा रथ चाहिए जिसके पहिए शौर्य और धैर्य हों। ऐसा रथ जिसकी ध्वजा नीति और नियति से समझौता न करे और जिसके घोड़े बल, विवेक, संयम और परोपकार हों।”

अयोध्या आज पुनः एक ऐतिहासिक अध्याय की साक्षी बनी, जिसने करोड़ों रामभक्तों की आस्था को नया प्रकाश दिया।