स्पॉट रिपोर्ट: बागमती ने कल्याणपुर के फुलहट्टा-भराव को किया बे’घर,जानिए इन बाढ़पीड़ितों की कहानी..

टीम’A2Zन्यूज़live’।कल्याणपुर।समस्तीपुर (बिहार)।
बागमती की बाढ़ की वजह से समस्तीपुर जिले के पश्चमी बॉर्डर क्षेत्र के कलौंजर पंचायत के अंतर्गत फुलहट्टा-भराव गांव पिछले 1 महीने से बागमती नदी की बाढ़ के पानी से तबाह है।

यहां की आबादी बाढ़ के पानी में रहने को विवश है। गांव की करीब 200 से ज्यादा परिवारों में बागमती नदी के बाढ़ ने तबाही मचा रखी है लेकिन इन लोगों के त्रिस्तरीय पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों से लेकर स्थानीय विधायक एवं सांसदों ने इनकी अब तक सुधि नहीं ली है।

किसी ने इनका हाल नहीं जाना है।इनकी हालात पर मदद का प्रयास नहीं किया है। सहानुभूति के दो शब्द नहीं बोले हैं। लिहाजा गांव के लोगों को इस बात का मलाल है कि जिन जनप्रतिनिधियों के भरोसे उन्होंने अपना, समाज और इलाके का तकदीर छोड़ रखा है।

वे इतना मतलबी और बेखबर कैसे बन सकते हैं? अपनी किस्मत के भरोसे यहां करीब 200 से ज्यादा घरों की आबादी अंधेरी रात में 12 घंटे और तन झुलसाती धूप में 12 घंटे प्रत्येक दिन पिछले 1 महीने से कैसे गुजर रही है? यह इनसे बेहतर कोई और नहीं बता सकता।

‘A2Zन्यूज़live’की टीम जब इस गांव में पहुंची तो पीड़ित एवं प्रभावित गांव के लोगों ने बेबाकी से अपनी बातों को रखा। अपने हालातों को बताया। उनकी बातों को सुनकर,उनके दुख-दर्द को सुनकर हम भी अवाक रह गए। गांव के टोला एवं बस्ती के लोगों ने बताया पिछले 1 महीने से बाढ़ की परेशानी से वे लोग तंग-तबाह हैं। खाने-पीने की परेशानी है।

घर से निकलने की परेशानी है। दवा दारू की परेशानी है। माल-मवेशी को खाने के पशु चारा नहीं है। रात के अंधेरों में दिन के उजालों में कब जलीय जीवो का हमला हो जाए कहना मुश्किल है। ऐसे में कैसे उनकी जिंदगी गुजर बसर हो रही है। यह सहज रूप से समझा जा सकता है। उनके नेताओं और प्रखंड के अधिकारियों ने उन्हें उनके गांव में अब तक सरकारी नाव की व्यवस्था नहीं की है।

बीमार लोगों को इलाज के लिए पानी में तैरकर कंधे पर उठाकर घर से ले जाना पड़ता है।गांव के लोगों को बाढ़ के पानी में शौचालय की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। क्या औरत,क्या मर्द,क्या बच्चे क्या जवान। बेबसी की जिंदगी में सभी एक साथ एक जैसे लाचार नजर आते हैं।

गांव के पशुपालक पशुओं को लेकर ऊंचे स्थलों पर शरण लिए हुए हैं। करीब 8 से 9 किलोमीटर दूर से रोजाना घास लाकर पशुओं को खिलाने की इनकी मजबूरी है। इन लोगों का बताना है कि इन तमाम मामलों की जानकारी स्थानीय कल्याणपुर अंचल के अंचलाधिकारी एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी को कई बार दी गई।

पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य से लेकर विधायक एवं सांसद से भी अपने हालात को बताया गया।

बावजूद इनकी हालात पर बदलने की दिशा में काम नहीं किया गया। इन्हें सरकारी मदद तो दूर अब तक इनका हाल-चाल जानना भी किसी ने मुनासिब नहीं समझा है।


वार्ड सचिव संजय राम का बताना है कि इनलोगों को कोइ राहत अभी तक नहीं मिला है।कोई सुनने को भी तैयार नहीं है।खाने पीने सहित सभी तरह की परेशानी है।

अबतक सामुदायिक किचेन भी शुरू नहीं की गई है।
ऐसे हालात में बिहार सरकार के बाढ़ पूर्व प्रबंधन तथा बाढ़ के बीच बचाव के दावों की पोल खुलती नजर आती है।

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