– ठंड बढ़ने के साथ हीं पीएचसी में पहुंचने लगे हाई बीपी एवं हॉट से जुड़े हुए मरीज।
मुजफ्फरपुर(बिहार)। दीपक कुमार तिवारी।
ठंड बढ़ने के साथ ही ब्लड प्रेशर तथा हॉट से जुड़े मरीजों के लिए परेशानी बढ़ने लगी हैं। लिहाजा क्षेत्र के लोग ब्लड प्रेशर तथा इससे जुड़ी हुई विभिन्न बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। पहले से जो लोग बीमार हैं,उनकी भी परेशानी इन दिनों बढ़ी हुई है। लिहाजा इस तरह के मरीजों का आना अस्पताल में शुरू है।वहीं कई लोग अपने घरों पर रहकर भी इसकी दवा ले रहे हैं।बन्दरा पीएचसी में चिकित्सा कर्मियों का बताना है कि औसतन 15 से 20 मरीज प्रतिदिन ब्लड प्रेशर से जुड़े हुए पीएचसी में पहुंच रहे हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचने वाले मरीजों में महिला तथा पुरुष दोनों तरह के होते हैं। जिसमें 40 प्लस उम्र के मरीजों की संख्या ज्यादा ज्यादा होती है, हालांकि युवाओं में भी इसके प्रकोप दिख रहे हैं।जबकि युवाओं में इसका असर नहीं दिखना चाहिए। बन्दरा पीएचसी में डॉ. दीपक सिद्धार्थ ने बताया कि इस समय जो सर्दी का मौसम है। ठंड का मौसम है।खासकर दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। ऐसे में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को खास सतर्कता की जरूरत है। जिन मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर है। उन्हें हार्ट से जुड़ी हुई बीमारियों का खतरा ज्यादा होती है।बीपी हाई होने पर ब्रेन हेमरेज या लकवा आदि के अटैक का खतरा ज्यादा होता है।

इन समयों में खुद पर नियंत्रण है जरूरी:
इस समय में उन्हें खासकर सतर्क रहना चाहिए। गर्म कपड़ों, खाना, पेय पदार्थों आदि का प्रयोग सभी को करना चाहिए। खाने में सलाद आदि का प्रयोग करना चाहिए। पेट में कब्ज नहीं रहनी चाहिए। किसी बात को लेकर टेंशन में नहीं रहना चाहिए। घबराहट से बचना चाहिए।वाद-विवादों तथा भारी शोर गुल,डीजे साउंड आदि से दूर रहना चाहिए।ऐसे लोगों को आंख आदि की समस्या भी हो सकती है। ऐसी कोई भी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक के संपर्क में आना चाहिए। उन्होंने बताया कि बीपी के मरीजों को ऐसे में रेगुलर दवा लेने की जरूरत है। इस तरह की सलाह बीपी के मरीजों को लगातार दी जा रही है। डॉ. दीपक ने बताया कि युवा वर्ग भी हाई बीपी के शिकार हो रहे हैं।पीएचसी आने वाले 20-30 उम्र के युवाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण दिख रहे हैं।
सही वर्ताव एवं सामान्य रहन सहन से बचाव सम्भव:
उन्होंने बताया कि घरों में सामान्यतया सभी लोगों को सामान्य बर्ताव करना चाहिए। सहज रहन-सहन तथा सहज व्यवहार अपनाने से हाई ब्लड प्रेशर से बचा जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर हार्ट संबंधी बीमारी से भी बचा जा सकता है। पीएचसी से जुड़े हुए चिकित्सा कर्मियों ने बताया कि पीएचसी में पहुंचने वाले मरीजों में ज्यादातर सुदूर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं एवं पुरुष अपने पारिवारिक एवं अन्य घरेलू कारणों से ज्यादातर चिंता के शिकार होते हैं।इस वजह से टेंशन के शिकार होते हैं और टेंशन की वजह से उनका बीपी हाई हो जाता है।वहीं सीनियर सिटीजन के लोग कई बार घरेलू,पड़ोसियों या रिश्तेदारों के किसी बातों को लेकर भी टेंशन में हाई बीपी के चपेट में होते हैं।
चिकित्सीय सलाह:
जाने-अनजाने लोग खानपान में भी संयम नहीं रख पाते हैं। कई बार लोग फैटी या ऑयली तथा खट्टे अंचार,खटाई आदि का प्रयोग करते हैं। कई लोग चिकन,मटन आदि भी ठंड के दिनों में ज्यादा प्रयोग शुरू कर देते हैं। इसकी वजह से भी परेशानी बढ़ जाती है। कुछ मरीजों का बताना है कि वे लोग कई दिनों तक नहाते भी नहीं हैं। कुछ लोग खुले में और ठंडे पानी से हीं नहाते हैं। रात में तुरत नींद टूटने के साथ हीं बेड से नहीं उठना चाहिए।खाली पेट तथा बिना गर्म कपड़ों के बाहर नहीं निकलना चाहिए। लिहाजा इन सब कारणों से भी हाई बीपी का लेवल बढ़ जाता है। चिकित्सक ने बताया कि लोगों को इन सब चीजों से बचना चाहिए।
पीएचसी प्रभारी बोले:
वहीं बन्दरा पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर नौशाद अहमद ने बताया कि बन्दरा पीएचसी में ब्लड प्रेशर की दवाएं उपलब्ध है। यहां आने वाले मरीजों को आवश्यक दवाएं एवं चिकित्सीय सलाह भी दी जा रही है।












