-सुदामा चरित्र से भक्ति और मित्रता का संदेश, श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मुजफ्फरपुर/बंदरा।दीपक। घोसरामा ब्रह्मस्थान परिसर में नवयुवक नाट्यकला परिषद् सह सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा प्रवाचिका निकुंज मंजरी ‘चंचला दीदी’ ने कहा कि जब-जब भक्तों पर विपदा आई है, प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। सुदामा चरित्र यह सिखाता है कि भक्ति में अभाव नहीं, केवल भाव की आवश्यकता होती है।
उन्होंने शुकदेव विदाई को वैराग्य की चरम अभिव्यक्ति तथा व्यास पूजन को गुरु-कृतज्ञता का प्रतीक बताया। कथा के दौरान सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष जैसे प्रसंगों का मार्मिक वर्णन कर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता का उदाहरण देते हुए उन्होंने समाज में समानता और सच्चे संबंधों का संदेश दिया।

इससे पूर्व मुख्य यजमान नवीन कुमार, राजीव कुमार, आलोक ठाकुर एवं विकास झा द्वारा व्यास पूजन कराया गया। आयोजकों ने बताया कि ग्रामवासियों के सहयोग से कार्यक्रम सफल हुआ। आयोजन धार्मिक आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम में पूर्व मुखिया अनिल ठाकुर, महेश ठाकुर, ललन कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह, रंजन ठाकुर, विमलेश ठाकुर, गणेश ठाकुर, फुलकांत झा सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।











