सड़क से हटी गाड़िया, पटना की हवा हुई साफ; प्रदूषण फैलाने वाली गैसों में आयी 50 फीसदी की कमी



संवाददाता।पटना।
बढ़ते कोरोना संक्रमण पर रोक लगाने और नयी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए पिछले दिनों पटना में सार्वजनिक और निजी परिवहन पर कई तरह के प्रत्यक्ष और परोक्ष रोक लगायी गयी हैं। सरकारी और निजी दफ्तरों में उपस्थिति भी कम कर दी गयी है और सभी दुकानों को भी एक साथ नहीं खुलने दिया जा रहा है।



इन सबका सीधा असर सड़कों पर वाहन लोड की कमी के रूप में दिख रहा है, जिससे पेट्रोल डीजल के जलने से निकलने वाले प्रदूषणकारी गैसों की मात्रा में भारी कमी आयी है और सीओ, एनओटू और एसओटू की मात्रा 50 फीसदी से भी अधिक घट गयी है।पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स 250-300 से घट कर महज 118 रह गया है। इसमें भी पीएम 10 जैसे धूलजनित कारकों के योगदान को हटा दें, तो यह 100 से नीचे पहुंच जायेगा जो स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी तरह संतोषप्रद कहा जा सकता है।


पिछले दिनों पटना मेंं नाइट कर्फ्यू लगाया गया।इसके अंतर्गत शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक वाहनों के जरूरी वजह के बिना आने-जाने पर रोक लगा दी गयी है। साथ ही पहले से ही 50 फीसदी सीट क्षमता से ही सवारी ढोने जैसे प्रतिबंध सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर लागू हैं।इन सबसे वाहनों का आवागमन घटा है और पहले की तुलना में लगभग एक तिहाई वाहन ही सड़क पर निकल रहे हैं।पहले जहां पटना की सड़कों पर हर दिन छह-सात लाख वाहन दौड़ते थे, अब इनकी संख्या घट कर दो से ढाई लाख के बीच रह गयी है।


गर्म हवाओं के चलने से नहीं घटा धूलजनित प्रदूषण:
भीषण गर्मी की शुरुआत हो जाने के कारण दोपहर में इन दिनों गर्म हवाएं चलती रहती हैं।इनके कारण पीएम 10 की मात्रा अब भी अपेक्षित से बहुत ऊंचे स्तर पर है. मुरादपुर में तो सोमवार को यह 401 तक दर्ज की गयी।पीएम 2.5 के स्तर में भी सूक्ष्म धूलकणों के समर्थन के कारण कम कमी हुई है और मौसम बदलने के बाद ही इनसे पूरी तरह निजात मिलेगी।

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