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श्रीराम के मानस चरित्रों को अपनाए बिना मानव जीवन की सार्थकता नहीं: नारायणी तिवारी

-श्रीराम के मानस चरित्रों को अपनाए बिना मानव जीवन की सार्थकता नहीं: नारायणी तिवारी

बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।

प्रखंड के बरियारपुर में नवनिर्मित हनुमान मंदिर के प्रांगण में पांच दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान बुधवार की रात अयोध्या से आई प्रख्यात कथावाचिका नारायणी तिवारी ने कहा कि भगवान श्रीराम का मानस चरित्र सभी मानव को अपने जीवन के चरित्र में उतारना चाहिए। मानव जीवन की सार्थकता तभी है जब भगवान श्रीराम के पद चिन्हों पर चलें तथा श्रीराम भक्त हनुमान जैसी भक्ति अटूट स्नेह अपने जीवन में आत्मसात करे।

 

उन्होंने कहा इंसान को अहम एवं वहम से मुक्त होकर अपने कर्तव्य पथ पर चलने की जरूरत है,लेकिन जरा सी लोभ के कारण इंसान स्वार्थी हो जाता है। जरा सी ज्ञान एवं धन-संपत्ति के कारण मानव अहंकारी प्रवृत्ति का हो जाता है। यही मानव के पतन एवं नाश का प्रमुख कारण है। जब तक मानव को इसका आभास होता है। तब तक वह मानव जीवन गंवा चुका होता है। जीवन के कीमती क्षण गंवा चुके होते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामायण का हर प्रसंग प्रेरक एवं मानव चिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करता है। भगवान श्रीराम का अवतरण जनकल्याण एवं मानव उत्थान के लिए हुआ था। कलियुग में इसकी जिम्मेवारी श्रीराम भक्त हनुमान के जिम्मे है। कार्यक्रम के दौरान धर्मादा कमिटी के प्रमुख सदस्यों के द्वारा कथा वाचिका को शॉल, पुष्पमाला आदि देकर सम्मानित किया गया। इस इस दौरान नर्मदा कमेटी के अध्यक्ष विमल सिंह सहित कौशल किशोर ठाकुर, वरुण गिरी,रमेश ठाकुर,विमलेश ठाकुर,बैजू झा,नारायण गिरी,सीताराम सिंह,चुनमुन ठाकुर ,रत्नेश कुमार सिंह,बच्चा सिंह,मुन्ना सिंह,सन्नू सिंह,अन्नू कुमार,नंद किशोर सिंह,मुकेश सिंह,राजीव सिंह आदि भी सक्रिय भूमिका में थे।