रसूखदार अभियुक्त को जेल की जगह अस्पताल में रखना पुलिस -प्रशासन और डाक्टर को पड़ा भारी



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*पीएमसीएच कैंपस स्थित आईजीआईसी के डायरेक्टर और जेल अधीक्षक को कोर्ट अवमानना की नोटिस
*कोर्ट ने अनुसंधानकर्ताओं की लापरवाही पर डीजीपी और एसएसपी तक को भेजा आदेश ,दी चेतावनी आगे से रखें सावधानी




पटना।आनंद।


कहते है न जब कानून का डंडा चलता है तो अच्छे -अच्छे की हेकड़ी निकल जाती हैं । क्रिमिनल केस में एक रसूखदार अभियुक्त ने जेल नहीं जाने की तिकड़म तो निकाल लिया और तत्काल सफलता भी मिल गयी लेकिन कोर्ट के पकड़ में आ गये और आखिरकार रसूखदार अभियुक्त गिरिराज मनोहर जालान को जेल जाना पड़ा।

यही नहीं इस प्रकरण में जिन लोगों ने सहयोग किया उसे भी कोर्ट का सामना करना पड़ा और बात अवमानना नोटिस तक पहुंच गया एवं लापरवाह अनुसंधानकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट ने डीजीपी एवं पटना के एसएसपी तक को आदेश भेज दिया । कोर्ट ने अनुसंधानकर्ता को चेतावनी तक दे डाली की आगे से सावधानी बरते । उक्त मामला राजधानी जिले के चौक थाना के कांड संख्या -434 /20 ,धारा 147 /148/149/341/323/447/448/307/504/506/120(बी) व 27 आर्म्स एक्ट से जुड़ा हैं । इस कांड के मुख्य आरोपी गिरिराज मनोहर जालान पर गोलीबारी करने का आरोप हैं।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुये गिरिराज मनोहर जालान को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में प्रस्तुत किया । एसीजेएम-4 ने अभियुक्त गिरिराज मनोहर जालान को फुलवारीशरीफ जेल भेजने का आदेश दिया । अचानक बीमारी का हवाला देकर अभियुक्त को पीएमसीएच कैंपस स्थित आईजीआईसी में भर्ती कर लिया गया । विपक्षी पार्टी ने कोर्ट में आवेदन दाखिल किया की कांड के अभियुक्त गिरिराज मनोहर जालान को पहले से कोई बीमारी नहीं हैं ।अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के लिए एक साजिश के तहत हॉस्पिटल में भर्ती कर लिया । इसमें केस के अनुसंधानकर्ता के खिलाफ धारा 166 व 225 के तहत एफआईआर करने का अनुरोध किया ।कोर्ट ने जेल अधीक्षक ,अनुसंधानकर्ता, आईजीआईसी के डायरेक्टर से रिपोर्ट तलब किया।


आईजीआईसी, पटना ने पत्रांक 3467 दिनांक 28-12-20 के द्वारा कोर्ट को बताया की अभियुक्त को 72 घंटे के लिए ऑब्जरवेशन में रखने के लिए बात कही गयी हैव। लेकिन डाक्टर द्वारा अभियुक्त के बीमारी के संबंध में किसी तरह का कोई कागजात या संबंधित डाक्टर का चिकित्सीय इलाज संलग्न कर नहीं भेजा गया हैं ।
पत्रांक 2706 दिनांक 28-12-20 द्वारा अनुसंधानकर्ता के भेजा गया है । जिसमें अनुसंधान ने कहां की अभियुक्त गिरिराज मनोहर जालान पुलिस अभिरक्षा में है। कोर्ट ने अनुसंधानकर्ता से स्पष्टीकरण किया की कोर्ट द्वारा अभियुक्त को को कब पुलिस अभिरक्षा प्रदान किया हैं । 48 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण दें ।


पत्रांक 2811 दिनांक 28-12-20 के माध्यम से अधीक्षक फुलवारीशरीफ जेल ने कोर्ट को बताया की बिना सशरीर उपस्थिति के किसी कैदी को कस्टडी वारंट स्वीकृत नहीं कर सकते । परन्तु जेल अधीक्षक ने यह स्पष्ट नहीं किया की अभियुक्त को कस्टडी में लेने के लिए कार्रवाई की गयी है।

कोर्ट ने यह पूछा था की अभियुक्त के संबंधित बीमारी का समुचित इलाज जेल अस्पताल में सम्भव है की नहीं । इस संबंध में जेल द्वारा कोई सूचना /जानकारी नहीं दी गयी । 48 घंटे के अंदर जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण की मांग की गयी । कोर्ट ने अनुसंधानकर्ता के लापरवाही को लेकर अनुसंधानकर्ता के खिलाफ जरूरी कार्रवाई व एफआईआर दर्ज करने को लेकर डीजीपी और पटना के एसएसपी को आर्डर कॉपी भेज दिया।

अनुसंधानकर्ता को कोर्ट ने चेतावनी दिया की आगे से ऐसी लापरवाही नहीं करें और अपने कार्य में सावधानी बरते ।
जेल अधीक्षक और आईजीआईसी के निदेशक द्वारा ससमय स्पष्टीकरण का जबाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुये कहां की क्यों न इसे कोर्ट का अवमानना माना जाएं । और पुनः आर्डरशीट की कौपी संबंधित पदाधिकारियों को रिसीव कराया गया एवं वाट्सअप भेजा गया । संज्ञान में आने के बाद कोर्ट ने जो कार्रवाई किया उसके बाद रसूखदार अभियुक्त गिरिराज मनोहर जालान को फुलवारीशरीफ जेल भेज दिया गया । इसके बाद जेल अधीक्षक पुरी तरह से कोर्ट रिमांड और कार्रवाई को लेकर सजग हो गये हैं ।

a2znews