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मंदिर की 17 एकड़ जमीन की जमाबंदी का मामला गरमाया, धार्मिक न्यास पर्षद ने डीएम से मांगी रिपोर्ट

-मंदिर की 17 एकड़ जमीन की जमाबंदी का मामला गरमाया, धार्मिक न्यास पर्षद ने डीएम से मांगी रिपोर्ट

मुजफ्फरपुर। जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुशहरी की भिखनपुर पंचायत में देवी-देवताओं के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री और रैयतों के नाम जमाबंदी कायम किए जाने का मामला सामने आया है। मामले को बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने गंभीरता से लिया है। पर्षद के अध्यक्ष डॉ. रणवीर नंदन ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
पर्षद ने जमीन की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ संबंधित धार्मिक न्यास की चल-अचल संपत्ति और अभिलेख पंजी-दो से मिलान कराकर विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। नए सर्वे खतियान के अनुसार भिखनपुर में लक्ष्मीनारायण जी महाराज, शिवजी महाराज और राम जानकी जी महाराज के नाम कुल 17 एकड़ से अधिक जमीन दर्ज बताई गई है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2007-08 के दौरान इस जमीन की खरीद-बिक्री शुरू हुई थी। हालांकि, लंबे समय तक जमीन की सरकारी रसीद देवी-देवताओं के नाम से ही कटती रही। पूर्व मुखिया उमाशंकर प्रसाद सिंह ने जमीन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर जिलाधिकारी, वरीय अधिकारियों और धार्मिक न्यास पर्षद से लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बावजूद उस समय ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।


मामले की पड़ताल में यह भी आरोप सामने आया है कि वर्ष 2019 के दौरान जमीन की जमाबंदी कथित रूप से रैयतों के नाम स्थानांतरित कर दी गई। एक ही जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज आवेदनों पर अलग-अलग आदेश पारित किए जाने से अंचल कार्यालय की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
शिकायत में तत्कालीन राजस्व कर्मचारी विश्वनाथ खरवार की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने सगे-संबंधियों के नाम भी देवी-देवताओं की जमीन की रजिस्ट्री कराई। शिकायत के अनुसार, इससे पहले राजस्व कर्मचारी दाखिल-खारिज के कई आवेदनों को अस्वीकृत करता रहा था, लेकिन कथित तौर पर परिजनों के नाम जमीन निबंधित होने के बाद रैयतों के नाम दाखिल-खारिज और जमाबंदी की प्रक्रिया शुरू हो गई।
पूरे मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी नागेंद्र कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले में गंभीर अनियमितताओं के बावजूद अब तक संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है।
अब धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से डीएम से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मामले में जांच और कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। पर्षद द्वारा जमीन के अभिलेख, वर्तमान जमाबंदी और धार्मिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति की जानकारी मांगी गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन के हस्तांतरण और जमाबंदी की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।