–गरीबी को मात देकर लक्की अंसारी ने रचा इतिहास, बिहार में हासिल किया दूसरा स्थान
पूर्णिया। हौसले बुलंद हों तो हालात की जंजीरें भी टूट जाती हैं। पूर्णिया से आई लक्की अंसारी की प्रेरणादायक कहानी ने इसे सच कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच पले-बढ़े लक्की ने इंटरमीडिएट परीक्षा में 478 अंक (95.60%) हासिल कर बिहार में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
खजांची हाट इलाके के एक छोटे से कमरे में रहने वाले लक्की के पिता मो. इम्तियाज फुटपाथ पर घड़ियाँ ठीक कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां पम्मी बेगम स्कूल में रसोइया के रूप में कार्यरत हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
लक्की ने भी हालात से समझौता करने के बजाय उनसे लड़ने का रास्ता चुना।

वह रोज़ाना 6 से 7 घंटे तक YouTube के माध्यम से पढ़ाई करता था और साथ ही एक मेडिकल दुकान पर काम भी करता था। दिनभर की थकान के बावजूद उसकी मेहनत और लगन लगातार जारी रही।
उसकी यह सफलता संघर्ष और समर्पण की मिसाल बन गई है। लक्की का कहना है कि यदि उसे नौकरी नहीं करनी पड़ती, तो शायद वह टॉपर बन सकता था, लेकिन उसकी यह विनम्रता ही उसकी सच्चाई को दर्शाती है।
आज उसकी उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। हर कोई उसकी मेहनत और जज़्बे की सराहना कर रहा है। लक्की का सपना है कि वह आगे चलकर शिक्षक बने और समाज को शिक्षा की रोशनी दे, ताकि कोई भी बच्चा गरीबी के कारण अपने सपनों से समझौता न करे।
यह कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उम्मीद, संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत की मिसाल है।










